छॆ बज गए उठो जल्दि,
बच्चो को उठाना है, नाश्ता भी बनाना है।
अखबार वाला नहीं आया आज,
और दूधवाले की तो दूध फट गयी आज।
आलू को तो छौक दिया,
फूल वाली की तो अपनी मर्ज़ी है',
और कुछ अगर बाकि हो तो,
बच्चों के गाड़ीवान की अपनी मर्ज़ी है।
जल्दी से फिर दोनों हम,
तैयार हुए बच्चों के संग।
छोड़ा बच्चो को पाठशाला फिर,
और चल दिए अलग रास्तों पर साथ फिर।
बच्चो को उठाना है, नाश्ता भी बनाना है।
अखबार वाला नहीं आया आज,
और दूधवाले की तो दूध फट गयी आज।
आलू को तो छौक दिया,
फूल वाली की तो अपनी मर्ज़ी है',
और कुछ अगर बाकि हो तो,
बच्चों के गाड़ीवान की अपनी मर्ज़ी है।
जल्दी से फिर दोनों हम,
तैयार हुए बच्चों के संग।
छोड़ा बच्चो को पाठशाला फिर,
और चल दिए अलग रास्तों पर साथ फिर।
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