Tuesday, 26 February 2013

Rishta

और उठती हुई लहरें जो इस तरफ आती हैं,
वह धीरे से ही सही पर हमारा साथ निभाती हैं।

हर पर टोकता, बोलता रहता,
पर इतने धीरे से बोलता है,
कि हम अपने ही धुन में रह जाते है,
और सुन उसे न पाते हैं।

सूरज सा वह निखरता है
और कभी नहीं वह ढलता ह।
दिन भर वह सुलगता है,
बिना खाए वह जीता है।
हमे दिन भर रोशन करता,
वह रत भर खड़ा रहता है।

वह हरदम तत्पर, सब्र रहता,
खुशियों में मिल जाता है।
हर पल साथ दिखता है,
और भी विशवास जगाता है।
हर पर का जैसे छण बीते
वह और भी निखरता जाता है।

यह बहुत सी परिभाशाओ में हमे मिलति है,
पर खुशकिस्मत है वो जिसे यह मिलति है।
यह दिल की प्यास बुझती है,
और कुछ नहीं वापिस मांगती है,
और हर पल रिश्ते गहराती है,
इस जग में दोस्ती कहलाती है।

No comments:

Post a Comment